प्रदेश प्रभारी बनते ही एक्शन मोड में स्मृति ईरानी, संगठन की बैठकों से पहले कार्यकर्ताओं को दो टूक

रायपुर: छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी बनने के बाद स्मृति ईरानी अपने पहले दौरे पर संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर सक्रिय नजर आईं। रायपुर स्थित भाजपा कार्यालय में उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि कार्यालय में केवल उन्हीं लोगों की मौजूदगी हो, जिन्हें बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने बिना बुलावे और अनावश्यक रूप से कार्यालय आने से बचने की हिदायत दी।

‘मन की बात’ सुनने अभनपुर पहुंचीं स्मृति ईरानी

रायपुर पहुंचने के बाद स्मृति ईरानी भाजपा के सह प्रभारी सिद्धार्थ शंभू के साथ अभनपुर पहुंचीं। यहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा सहित पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुना।

संगठन की मजबूती और आगामी रणनीति पर मंथन

स्मृति ईरानी अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान पार्टी पदाधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें करेंगी। इन बैठकों में संगठन की स्थिति की समीक्षा और आगे की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन और प्रदेश महामंत्रियों के साथ संगठनात्मक बैठक रखी गई है। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक प्रदेश पदाधिकारियों के साथ समीक्षा और आगामी रणनीति पर चर्चा होगी।

दोपहर 1:30 बजे से 2:30 बजे तक संभाग प्रभारी, सह प्रभारी, जिला प्रभारी, जिला सह प्रभारी और जिला अध्यक्षों की संयुक्त बैठक निर्धारित है।

पूर्व सांसदों-विधायकों से लेकर कोर ग्रुप तक बैठकें

दोपहर बाद बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा। शाम 3:30 बजे से 5 बजे तक पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों के साथ चर्चा होगी। इसके बाद शाम 5:30 बजे से 7 बजे तक पार्टी के पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ संवाद का कार्यक्रम है।

दिन के अंत में शाम 7 बजे से रात 8:30 बजे तक भाजपा कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है।

संगठनात्मक अनुशासन पर रहेगा जोर

स्मृति ईरानी के दौरे में संगठनात्मक समीक्षा, पदाधिकारियों के बीच समन्वय और आगामी रणनीति पर चर्चा प्रमुख विषय रहेंगे। भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर दिए गए उनके संदेश को संगठनात्मक अनुशासन पर जोर के रूप में देखा जा रहा है। अगले दो दिनों में होने वाली बैठकों से प्रदेश संगठन की प्राथमिकताओं को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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