सड़क बनी नहीं और डामर उखड़ने लगा, 90 करोड़ के निर्माण पर भ्रष्टाचार के आरोप; अब होगी तकनीकी जांच

खैरागढ़ :  करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से बन रही राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क निर्माण पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। राजनांदगांव से खैरागढ़ की ओर आने वाले मार्ग के कुछ हिस्सों में पहली डामर परत उखड़ने लगी है। कई स्थानों पर गिट्टी बाहर नजर आ रही है, जबकि सड़क की सतह भी ऊबड़-खाबड़ हो गई है।

नई सड़क की शुरुआती परत की यह स्थिति सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी और गुणवत्ताविहीन काम के आरोप भी लगाए गए हैं।

पहली परत खराब, विभाग ने बारिश को बताया वजह

सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विभाग का कहना है कि पहली डामर परत बिछाए जाने के बाद हुई तेज बारिश और पानी के जमाव के कारण कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

खैरागढ़ की उप अभियंता स्मारिका तिवारी के मुताबिक सड़क पर अभी दो और परतें बिछाई जानी बाकी हैं। जहां पहली परत खराब हुई है, वहां क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर दोबारा डामरीकरण किया जाएगा।

हालांकि, पहली परत के जल्दी क्षतिग्रस्त होने को लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इसी वजह से सड़क में इस्तेमाल सामग्री, डामर की मोटाई, कॉम्पैक्शन और तकनीकी निगरानी जैसे पहलुओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद जांच की मांग

मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने सितंबर 2026 में राजनांदगांव-खैरागढ़ और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं को लेकर शिकायत की थी।

शिकायत में निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार और गुणवत्ताविहीन निर्माण के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की गई थी। शिकायत के बाद अब विभागीय स्तर पर तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

चार सदस्यीय समिति करेगी सड़क की परत-दर-परत जांच

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी ने 2 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है।

समिति सड़क निर्माण में इस्तेमाल हुए GSB, WMM, सबग्रेड और डामरीकरण की गुणवत्ता की जांच करेगी। इसके अलावा बिटुमिन की मात्रा, सड़क की मोटाई, घनत्व, ग्रेडेशन, लेवल और एग्रीगेट जैसे तकनीकी मानकों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कार्य एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई, भुगतान पर भी विचार

जांच के दौरान यदि गुणवत्ता में समझौता, वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात आदेश में कही गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों के भुगतान पर रोक लगाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं डोंगरगांव-कुमरदा समेत जिन स्थानों पर सड़क उखाड़कर छोड़ दी गई है, वहां सुरक्षित आवागमन के लिए तत्काल मरम्मत, चेतावनी संकेत और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

तीन दिन में आएगी जांच रिपोर्ट

अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जांच समिति की रिपोर्ट होगी। चार सदस्यीय समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क की पहली डामर परत के क्षतिग्रस्त होने की वजह केवल बारिश और पानी है या निर्माण के दौरान तकनीकी स्तर पर भी कोई कमी रही है।

करीब 90 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना पर उठे सवालों के बीच अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सड़क पूरी होने से पहले ही उसकी गुणवत्ता की जांच शुरू होने से निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

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