देवभोग में शुद्ध पानी की मांग पर बवाल, सीएमओ पर ज्ञापन लेने से इनकार का आरोप; उपाध्यक्ष को सौंपा आवेदन

गरियाबंद : नगर पंचायत देवभोग में पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता और सफाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। वार्ड क्रमांक 3, 4, 5 और 6 में पेयजल स्रोतों की जांच और सफाई की मांग को लेकर 40 से अधिक महिलाएं नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं। महिलाओं ने जल स्रोतों की जांच कराने और दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग रखी।

नगरवासियों का आरोप है कि जब महिलाएं ज्ञापन देने नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं तो प्रभारी सीएमओ ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिलाओं और स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील यादव को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

चार वार्डों में पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल

नगरवासियों के मुताबिक वार्ड क्रमांक 3, 4, 5 और 6 के पेयजल स्रोतों में टीडीएस की मात्रा निर्धारित मानक से करीब दो से ढाई गुना तक अधिक होने की शिकायत है। इन वार्डों के बड़ी संख्या में लोग पेयजल के लिए वार्ड क्रमांक 3 स्थित सोलर सिस्टम आधारित जल स्रोत पर निर्भर हैं।

वार्ड निवासी दीनदयाल सोनी के अनुसार, अब इस जल स्रोत से भी दूषित पानी आने की शिकायत सामने आ रही है। बताया गया कि यहां लगा सोलर सिस्टम भी फिलहाल बंद है। इसके चलते लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

पानी के लिए 1 से 2 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पेयजल स्रोतों की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण कई परिवारों को एक से दो किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। वहीं, आर्थिक और अन्य कारणों से कुछ परिवार अभी भी स्थानीय स्रोतों के पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

नगरवासियों ने जल स्रोतों की तत्काल जांच, सफाई और आवश्यक संधारण कार्य कराने की मांग की है, ताकि लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।

चार साल में 8 लोगों की किडनी खराबी से मौत का दावा

पेयजल की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता का एक बड़ा कारण वार्ड क्रमांक 3 में सामने आया कथित स्वास्थ्य संकट भी है। नगरवासियों ने दावा किया है कि पिछले चार वर्षों में वार्ड क्रमांक 3 में आठ लोगों की किडनी खराबी से मौत हुई है।

लोगों के अनुसार पूरे देवभोग क्षेत्र में किडनी खराबी से मौत का आंकड़ा 15 से अधिक बताया जा रहा है। हालांकि, इन मौतों का कारण दूषित पेयजल ही है, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसके बावजूद स्थानीय लोग जल स्रोतों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

समाधान शिविर में उठ चुका है मामला

नगरवासियों के मुताबिक पेयजल समस्या को लेकर पार्षद सूर्यकांत सिंदूर ने समाधान शिविर में जल स्रोतों की जांच और समस्या के निराकरण की मांग रखी थी। आरोप है कि समाधान पोर्टल पर शिकायत के निराकरण की जानकारी दर्ज कर दी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर जल स्रोतों की जांच को लेकर पीएचई और नगर पंचायत के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं हो सका।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी वजह से समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

ज्ञापन लेने से इनकार का आरोप, उपाध्यक्ष को सौंपा आवेदन

लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज महिलाएं जब नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं तो विवाद की स्थिति बन गई। महिलाओं का आरोप है कि प्रभारी सीएमओ दुष्यंत साहू ने उनका ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया।

महिलाओं के मुताबिक, पूछने पर सीएमओ ने कथित तौर पर कहा कि ज्ञापन देने की प्रक्रिया सही नहीं थी, इसलिए वह ज्ञापन स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बाद महिलाओं और नगरवासियों ने नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील यादव को ज्ञापन सौंपा।

महिलाओं ने कहा कि उनकी मांग कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि शुद्ध और सुरक्षित पेयजल जैसी मूलभूत जरूरत से जुड़ी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जल स्रोतों की जांच और सफाई करा दी जाती तो उन्हें बार-बार नगर पंचायत कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

विभाग ने कहा- सैंपल लिए जा चुके हैं

इस मामले में नगर पंचायत देवभोग के प्रभारी सीएमओ दुष्यंत साहू ने बताया कि जल स्रोतों की जांच और संधारण को लेकर पीएचई के इंजीनियर से चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों से पानी के नमूने लिए जा चुके हैं।

सीएमओ के मुताबिक जांच रिपोर्ट आने के बाद जल स्रोतों की सफाई और जरूरत के अनुसार अन्य आवश्यक कार्य कराए जाएंगे।

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