नियमितीकरण के दावे पर हाईकोर्ट नाराज, 108 कर्मचारियों के मामले में रजिस्ट्रार को 2 सितंबर को पेश होने का आदेश

बिलासपुर : हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में लंबे समय से कार्यरत 108 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है. इस मामले में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार प्रो अश्वनी दीक्षित को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर जवाब देने कहा है. साथ ही कुलपति प्रो आलोक चक्रवाल को शपथ पत्र देने कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी.

दरअसल, 2008 में राज्य सरकार ने आदेश दिया था कि 10 साल की सेवा पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए. इस आदेश के तहत गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति प्रो. एलएम मालवीय ने तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश जारी किया. 2009 में लेकिन जब यूनिवर्सिटी को ‘केंद्रीय’ दर्जा मिला, तो प्रबंधन ने पुरानी शर्तों को नजरअंदाज कर नियमितीकरण का आदेश रद्द कर दिया. इसके बाद से कर्मचारी परेशान हो रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब तक नियमित होने का किसी तरह का लाभ नहीं मिला है.

प्रकरण के मुताबिक सीयू के कर्मचारी धन्नू पांडे और अन्य ने यह याचिका दायर की है. पिछली सुनवाई में 14 जुलाई को हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार अश्विनी दीक्षित को अपना हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था. हलफनामे पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और इससे संतुष्ट नहीं हुआ. कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में सिर्फ रिटायरमेंट के बकाया भुगतान का ज़िक्र किया गया है जबकि विवि को नियमित वेतन के साथ ही पेंशन और दूसरी सुविधाओं के बारे में भी बताना था. कोर्ट ने इसे अवमानना की श्रेणी में माना. नाराज कोर्ट ने अश्विनी कमार दीक्षित (रजिस्ट्रार, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय) को 2 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से इस कोर्ट में पेश होकर जवाब देने कहा है.

अश्विनी कुमार दीक्षित (रजिस्ट्रार, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय) द्वारा पेश किए गए हलफनामें में किसी भी बात पर साफ जवाब नहीं देते हुए गोलमाल बातें कहीं गईं हैं. इसमें कहा गया है कि सभी कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया है जबकि किसी कर्मचारी को भी पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है. सीयू ने अपने हिसाब से वेतन का निर्धारण कर दिया है. सीयू का कहना है कि यूजीसी से फंड नहीं मिलने के कारण ऐसा किया जा रहा है. इसके साथ ही पीएफ के मामले में पीएफ विभाग को जिम्मेदार बताया गया है. सीयू की ओर से कहा गया कि कर्मचारियों का उनके संबंधित नियमित पदों पर वेतनमान समायोजित कर दिया गया है. इस पर कर्मचारियों की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई और कहा गया कि सिर्फ एक माह का रेंडम वेतन दिया गया है और कर्मचारियों को चतुर्थ वर्ग का बताया गया है जबकि कर्मचारी अलग-अलग वर्ग के हैं.

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