डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया, ₹95.20 तक पहुंचा अमेरिकी मुद्रा का भाव

भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार में आज उस समय हड़कंप मच गया जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर ₹95.20 पर जा गिरा। वैश्विक बाजारों में डॉलर की बढ़ती मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल ने भारतीय करेंसी की कमर तोड़ दी है। यह पहली बार है जब रुपये ने ₹95 का स्तर पार किया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर बड़े संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

रुपये में इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का $120 प्रति बैरल के पार जाना है। अमेरिका द्वारा ईरान पर बढ़ाए गए दबाव और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। चूँकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपये की वैल्यू घट रही है। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश कर रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की इस बिकवाली ने रुपये पर दबाव और बढ़ा दिया है।

आम आदमी पर कैसा होगा असर?

  • महंगा होगा पेट्रोल-डीजल: कच्चे तेल के आयात के लिए भारत को अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक सामानों के बढ़ेंगे दाम: चीन और अन्य देशों से आयात होने वाले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसे गैजेट्स महंगे हो जाएंगे।
  • विदेश में पढ़ाई और घूमना: जो छात्र विदेश में पढ़ रहे हैं या जो लोग विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, उनका बजट 10-15% तक बढ़ सकता है क्योंकि उन्हें अब डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये देने होंगे।
  • बढ़ेगी खाने की थाली की कीमत: खाद्य तेलों और दालों के आयात महंगे होने से रसोई का बजट भी बिगड़ सकता है।

शेयर बाजार में भी दिखा डर

रुपये की इस फ्री-फॉल का असर दलाल स्ट्रीट पर भी देखने को मिला। आज सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि रुपये की कमजोरी से कंपनियों का इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ जाएगा, जिससे उनके मुनाफे में कमी आएगी।

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