माता सीता की पूजा में ये काम जरूर करें, वरना अधूरी रह जाएगी आराधना

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सीता नवमी का पावन पर्व शनिवार, 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। शीघ्र विवाह और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन माता सीता और प्रभु श्री राम की संयुक्त रूप से (एक साथ) पूजा की जाती है। आइए जानते हैं माता जानकी की पूजा से जुड़ी अहम बातें, जिनके बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है।
- माता सीता को कमल या गुड़हल का फूल अत्यंत प्रिय माने गए हैं।
- पूजा में अर्पित करने के लिए पीले रंग के वस्त्र या लाल चुनरी का इस्तेमाल जरूर करें।
- अखंड सौभाग्य के लिए माता को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी सहित 16 शृंगार अर्पित करना चाहिए।
- भोग के लिए पूजा में पीले फल, गुड़ या घर में बनी शुद्ध मिठाइयां शामिल कर सकते हैं।
- माता सीता के भोग में तुलसी दल भी जरूर शामिल करना चाहिए।
- पूजा के दौरान गाय के घी का दीपक भी जरूर जलाना चाहिए।
पूजा में जरूर करें ये शुभ कार्यवैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए माता सीता को 16 शृंगार की सामग्री करें और लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं। सीता नवमी या किसी भी राम-जानकी पूजा में ‘जानकी चालीसा’, ‘जानकी स्तुति’ और ‘श्री रामायण जी’ का पाठ जरूर करें। इसके बिना आराधना अधूरी मानी जाती है। माता सीता की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए आप सीता नवमी के अवसर पर छोटी कन्याओं को भोजन भी करवा सकते हैं।
मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
सीता नवमी की पूजा के समय माता जानकी के माथे पर सिंदूर लगाएं। इसके बाद उसी सिंदूर को प्रसाद स्वरूप अपने माथे (मांग) पर लगाएं। इससे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही माता सीता की पूजा में जानकी स्तुति का पाठ भी जरूर करना चाहिए।
इस तरह करें मंत्र जपपूजा में माता सीता के मंत्रों का जप हमेशा ‘तुलसी की माला’ से ही करना चाहिए। दांपत्य जीवन में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए आपको ‘ॐ पतिव्रतायै नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए। इसके साथ ही माता जानकी और प्रभु राम की कृपा के लिए “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।







