ओवररेट शराब से शुरू हुआ विवाद, कर्मचारी पर मारपीट का आरोप — आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

बलौदाबाजार : क्षेत्र में शराब दुकान की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम खपराडीह निवासी एक मजदूर के साथ कथित मारपीट और ओवररेट शराब बिक्री के मामले ने न सिर्फ पुलिस कार्रवाई को जन्म दिया, बल्कि आबकारी विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
पीड़ित के अनुसार, वह 10 अप्रैल की रात करीब 9 बजे हिरमी स्थित शराब भट्ठी से अंग्रेजी शराब खरीदने गया था। यहां उसे तय कीमत 120 रुपये की जगह 130 रुपये प्रति पौवा के हिसाब से शराब दी गई। विरोध करने पर कर्मचारी ने “लेना है तो लो, नहीं तो जाओ” कहकर उसे मजबूर कर दिया।पीड़ित ने 4 पौवा के लिए 520 रुपये चुकाए और इसकी शिकायत करने की बात कहकर वहां से निकल गया।

शिकायत के बाद हुई मारपीट
रात करीब 11 बजे जब पीड़ित सुहेला स्थित एक पान ठेले पर पहुंचा, तो वहां शराब दुकान के कर्मचारी गोपाल यदु और उसके साथी देवेन्द्र ने उसे घेर लिया। आरोप है कि दोनों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और हाथ-मुक्कों से मारपीट की।
बताया जा रहा है कि गोपाल यदु ने हाथ में पहने कड़े से वार किया, जिससे पीड़ित के बाएं भौंह से खून बहने लगा। साथ ही कंधे और सीने में भी अंदरूनी चोटें आई हैं। घटना के चश्मदीद गवाह भी सामने आए हैं।

पुलिस ने की कार्रवाई, लेकिन…
पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में आबकारी विभाग की चुप्पी और ढीला रवैया अब चर्चा का विषय बन गया है।

आबकारी विभाग पर क्यों उठ रहे सवाल?
आरोपी गोपाल यदु पर पहले भी मारपीट का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है।
नियमों के अनुसार, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को शासकीय शराब दुकान में कर्मचारी नहीं रखा जाना चाहिए।
इसके बावजूद उसे नौकरी में बनाए रखना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

CCTV पर भी विवाद
जब इस मामले में आबकारी जिला अधिकारी मुकेश अग्रवाल से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज में यह नहीं दिख रहा कि शराब उनकी दुकान से खरीदी गई थी और विवाद दुकान के बाहर हुआ है।
वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान के CCTV कैमरे या तो स्पष्ट नहीं होते या कई बार बंद कर दिए जाते हैं, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ पाती।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या आबकारी विभाग अपने कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहा है?
पहले से विवादित कर्मचारी को नियम विरुद्ध क्यों रखा गया?
और जब दोबारा गंभीर आरोप लगे, तो कार्रवाई से बचने की कोशिश क्यों?

निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। पुलिस की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन जब तक आबकारी विभाग ठोस कदम नहीं उठाता, ऐसे मामले रुकने वाले नहीं हैं।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस पर क्या सख्त कदम उठाता है या फिर मामला ‘राम भरोसे’ ही चलता रहेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button