मेडिकल जांच में क्यों नहीं पकड़ में आ रहा हार्ट अटैक का खतरा? नए शोध में बड़ा खुलासा

हृदय बिना एक पल भी रुके आजीवन धड़कता है, लेकिन गलत आहार और दिनचर्या, धूमपान, संक्रमण जैसे कारण इसे हमेशा के लिए थाम सकते हैं। आज जिस तरह आफिस में काम करते हुए, यात्रा करते हुए, खेल के मैदान में, यहां तक कि घर के सोफे बैठे बैठे हार्ट अटैक से मौतें हो रही हैं, उससे सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

कोई भी बीमारी मेडिकल जांच से स्पष्ट हो जाती है, पर जिस तरह सेहतमंद दिखने वाले व्यक्ति हार्ट अटैक की चपेट में आ रहे हैं, उससे सवाल उठता है कि स्वास्थ्य जांच में पहले ऐसा कोई रेड फ्लैग या हाई रिस्क क्यों नहीं दिखा।

भारतीय मरीजों पर हुआ एक हालिया शोध बताता है कि पहली बार हार्ट अटैक के 80 प्रतिशत मरीजों में वैश्विक मानकों पर आधारित हार्ट रिस्क कैल्कुलेटर खतरों को सही ढंग से भांपने में फेल साबित हुए। इस शोध की अगुवाई करने वाले जीबी पंत अस्पताल के लिए कार्डियोलाजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित गुप्ता बताते हैं कि स्वास्थ्य जांचने का पश्चिमी माडल भारतीय मरीजों के खतरों का सटीक आकलन नहीं कर पाते।

खतरा होने बावजूद भी ये मानक अक्सर इसे कम या मध्यक रिस्क श्रेणी में रखते हैं। डाक्टर इन्हीं मानकों के आधार पर बीमार की सही स्थिति और उपचार की योजना बनाते हैं। जब बीमारी का सटीक अनुमान ही नहीं लगेगा, तो जाहिर है कि समय रहते सही उपचार मिल पाना कठिन हो जाएगा।

भारतीयों की स्थिति बिल्कुल अलग

हमें समझना होगा कि भारतीयों के सामने रिस्क फैक्टर बिल्कुल अलग तरह के होते हैं। भारतीयों में हार्ट से जुड़ी बीमारी में अक्सर देखा जाता है कि इसके शुरुआती लक्षण पकड़ में नहीं आते या कहें वर्तमान मानकों पर सटीक स्थिति का पता ही नहीं चल पाता।

भारतीय होना भी एक रिस्क फैक्टर माना जा सकता है। अगर आप डाक्टर से जानना चाहते हैं कि अगले 10 साल में हार्ट अटैक होने का रिस्क कितना है, तो वे इसका अंदाजा रिस्क स्कोर के आधार पर लगाएंगे। फिलहाल, सभी रिस्क मापने के तरीके पश्चिमी मानकों पर आधारित हैं, जबकि भारतीयों की प्रोफाइल बिल्कुल अलग है।

डॉ. गुप्ता के अनुसार, हार्ट अटैक मरीजों पर पड़ताल करते देखा गया कि जो हार्ट अटैक के गंभीर रिस्क वाले मरीज थे, वे भी नो रिस्क स्कोर के अंदर क्लासीफाई किए गए थे, असली चिंता यहीं से शुरू होती है। ऐसे में भारतीयों के लिए कस्टमाइज स्कोर की आवश्यकता है, ताकि उनकी सेहत की सही स्थिति के बारे में जाना जा सके।

कस्टमाइज रिस्क फैक्टर के साथ लिपिड प्रोफाइल, प्रदूषण, तनाव जैसे कारणों को भी देखना होगा। भारतीयों में मोटापा, लिपिड प्रोफाइल अलग तरह का होता है। डॉ. गुप्ता की मानें तो भारतीय मरीजों के लिए अपना रिस्क कैल्कुलेटर विकसित किया जा रहा है।

हार्ट अटैक को समझना जरूरी

हार्ट अटैक होने पर सीने में दर्द सबसे आम लक्षण है। लेकिन, कुछ लोगों में खासकर महिलाओं, बुजुर्गों, डायबिटीज ग्रस्त लोगों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं, जैसे जी मिचलाना, गर्दन या पीठ में हल्का दर्द हो सकता है। कुछ हार्ट अटैक अचानक होते हैं, तो वहीं कुछ मामलों में घंटों, कई दिनों या हफ्तों पहले लक्षण दिखने लगते हैं। सीने में दर्द या दबाव (एंजाइना) जो बार-बार होता रहता है और आराम करने पर भी ठीक नहीं होता, यह एक शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकता है। एंजाइना दिल तक खून के बहाव में अस्थायी कमी के कारण होता है।

हार्ट अटैक के आम लक्षण

  1. सीने में दर्द, जो दबाव, जकड़न, पीड़ा, कसाव या टीस जैसा महसूस हो सकता है
  2. दर्द या बेचैनी जो कंधे, बांह, पीठ, गर्दन, जबड़े, दांतों या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैल जाए
  3. ठंडा पसीना
  4. थकान
  5. सीने में जलन या अपच
  6. चक्कर आना
  7. बेहोशी
  8. जी मिचलाना
  9. सांस लेने में दिक्कत

हार्ट अटैक आने की दशा में क्या करें?

अगर कोई व्यक्ति अचेत हो जाता है और लगता है कि हार्ट अटैक आ गया है तो तुरंत एंबुलेंस से हास्पिटल ले जाने का प्रयास करना चाहिए। अगर व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है या उसकी नब्ज नहीं मिल रही है, तो सीपीआर शुरू करना चाहिए।

अगर आपने सीपीआर की ट्रेनिंग नहीं ली है, तो सिर्फ हाथों से सीपीआर करें। उस व्यक्ति की छाती पर जोर से और तेजी से दबाव डालें, लगभग 100 से 120 बार प्रति मिनट। ऐसा तब तक करते रहें जब तक मेडिकल मदद आप तक पहुंच न जाए।

अगर आप सीपीआर प्रशिक्षित हैं और अपनी क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं तो दो ‘रेस्क्यू ब्रीथ’ देने से पहले 30 बार छाती दबाने से शुरुआत करें। 30 बार छाती दबाने और दो ‘रेस्क्यू ब्रीथ’ देने का यह क्रम तब तक जारी रखें, जब तक मेडिकल मदद न पहुंच जाए।

हार्ट की समस्या के पीछे मुख्य कारण

  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी)- इसका मुख्य कारण, जिसमें प्लाक जमने (एथेरोस्क्लेरोसिस) से दिल तक खून का बहाव रुक जाता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्राल- एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्राल की अधिकता होना और हाई ब्लड प्रेशर समय के साथ धमनियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • जीवनशैली से जुड़े कारक- धूमपान, अस्वस्थ खान-पान (जिसमें सैचुरेटेड फैट और सोडियम ज्यादा हो), शारीरिक गतिविधि की कमी और शराब का अत्यधिक सेवन।
  • लंबे समय का तनाव- अधिक तनाव और चिंता दिल की बीमारी का कारण बन सकते हैं।
  • अन्य कारक- डायबिटीज, मोटापा और परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास।

एबीसीडीई से स्वस्थ रखें अपना हार्ट

डॉ. मोहित गुप्ता, डायरेक्टर प्रोफेसर, कार्डियोलाजी, जीबी पंत अस्पताल, दिल्ली बताते हैं कि भारतीयों को हार्ट की बीमारियों से बचना है और स्वस्थ रखना है तो एक अलग तरह के एबीसीडीई पर काम करना होगा।

ए- अलर्ट रहें- हर भारतीय को जागरूक और अलर्ट होना होगा, 18 साल की उम्र होते ही साल में एक बार प्रोफाइल टेस्ट करना जरूरी है। छाती में दर्द होने, असामान्य लक्षण होने या ऐसी कोई एक्टिविटी जो आप पहले कर पाते थे, लेकिन अब कठिनाई महसूस करते हैं तो सेहत की जांच अवश्य कराएं। महिलाओं में कुछ अलग तरह के लक्षण होते हैं। सांस फूलने जैसी समस्या लगातार हो रही है तो डाक्टर से तुरंत मिलना चाहिए।

बी-ब्लडप्रेशर जांचें- दिल की सही सेहत के लिए ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करना जरूरी है। भारत में 25 प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें ब्लडप्रेशर की समस्या है। बिना लक्षण वाला ब्लडप्रेशर हार्ट के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि इसकी जांच कराएं और इसे नियंत्रित रखें। साल में कम से कम एक बार अवश्य जांच कराएं।

सी- सिगरेट बंद और कोलेस्ट्राल कंट्रोल में- किसी रूप में धूमपान और सिगरेट हार्ट के खतरों को बढ़ाता है। इसी तरह कोलेस्ट्राल को कंट्रोल करें। एलडीएल कोलेस्ट्राल भारतीयों में 100 से कम होना चाहिए। हार्ट के मरीजों में 70 या 50 से भी कम होना चाहिए। लिपिड प्रोफाइल की वैल्यू को लेकर सावधान रहना चाहिए।

डी- डाइट रहे दुरुस्त- सही भोजन स्वस्थ्य रहने के लिए जरूरी है। गरिष्ठ भोजन, घी, तेल की अधिकता वाले भोजन से दूर रहना होगा। हरी सब्जियों, मौसमी फलों को भोजन में शामिल करना चाहिए।

ई-एक्सरसाइज और सही इमोशन जरूरी- स्वस्थ हृदय के लिए हर हाल में एक्सरसाइज की आदत डालनी होगी। प्रतिदिन से 30 से 35 मिनट चलना जरूरी है। एक घंटा रोज पैदल चलना आपकी उम्र में वृद्धि कर सकता है। इमोशन को कंट्रोल करना सीखें, तनाव से मुक्त रहें। इस तरह हेल्थ की इस एबीसीडीई को जीवन में उतार लें, स्वस्थ रहना कठिन नहीं है।

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