पीएम आवास पर भाजपा के झूठे दावे की रोज खुल रही है पोल, पात्र हितग्राही आत्महत्या करने मजबूर : सुरेंद्र वर्मा

रायपुर : धमतरी कलेक्टोरेट में जनदर्शन के दौरान पीएम आवास से बार बार नाम काटे जाने से व्यथित युवक के आत्मदाह के प्रयास को भाजपा सरकार के वादाखिलाफी का प्रमाण करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार 18 लाख प्रधानमंत्री आवास देने के नाम पर केवल झूठे दावे करके वाहवाही लूट रही है प्रार्थी को नियमो का हवाला देकर डेढ़ साल से घुमाया जा रहा था, सर्वे सूची में शामिल करने का झांसा देकर योजना का लाभ अब तक नहीं दिया गया जिससे व्यथित होकर युवक ने खुद पर केरोसिन डाल लिया है और आग लगाने की कोशिश की। पूरे प्रदेश में पीएम आवास के पात्र हितग्राही करण सोनवानी की तरह पक्के मकान की बाट जोह रहे हैं लेकिन यह सरकार केवल झूठे दावे करके श्रेय लेने में लगी है अब लोगों के धैर्य खत्म होने लगा है। इस सरकार से उम्मीदें खत्म हो चुकी है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार के द्वारा खिलाफ से पूरे प्रदेश की जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रही है। भाजपा नेता राजनैतिक इवेंट के लिए बार बार योजना का फार्म भरवाते हैं, उनकी लालच देकर उनकी मजबूरी का तमाशा बनाते हैं लेकिन जब देने की बारी आती है तो नाम कट जाता है। डोमा गांव रहने वाले करण सोनवानी ने पीएम आवास योजना के लिए इसी तरह ही आवेदन किया है, लेकिन बार बार सूची से उसका नाम काटा जा रहा था, इसी से परेशान होकर ऐसा अनुचित कदम उठाने मजबूर होना पड़ा। संवेदनहीन सरकार में पीड़ित ही प्रताड़ित हो रहे हैं।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मोदी की गारंटी छत्तीसगढ़ में पूरी तरह से फेल हो चुकी है। 2022 तक हर सर पर पक्का छत देने का वादा जुमला साबित हो चुका है। 2023 की विधानसभा चुनाव के दौरान 18 लाख प्रधानमंत्री आवास देने का वादा किया गया, दावा किया गया कि साय सरकार के शपथ ग्रहण के बाद पहला निर्णय 18 लाख पीएम आवास की स्वीकृति का फर्जी दावा किया गया लेकिन आज तक उन 18 लाख प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों की सूची जारी नहीं की गई। सरकार के पास लाखों शिकायत पीएम के संदर्भ में है लेकिन यह सरकार केवल कागजी दावे करके गरीबों के हक और अधिकारों पर डकैती कर रही है। पूरे प्रदेश में पात्र हितग्राही दर दर भटकने मजबूर हैं।

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