मुलेर में विकास की नई सुबह,नियद नेल्लानार योजना से बदली तस्वीर

दंतेवाड़ा : दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा ब्लॉक का सुदुर सीमावर्ती गांव मुलेर कभी धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र में गिना जाता था।मूलभूत सुविधाओं से वंचित और विकास से दूर हाशिये में रहे मुलेर में आज बदलाव की बयार बह रही है। इस गांव में अब विकास कार्यों की गूंज सुनाई दे रही है। यह सब संभव हो पाया है ‘नियद नेल्लानार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन से, जिसने प्रशासन और आम जनता के बीच विश्वास की एक नई डोर बांधी है।जहां पहले ग्रामीण सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब इन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।योजना के तहत मुलेर ग्राम पंचायत में कुल 62 विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है,जिसकी अनुमानित लागत 9 करोड़ 32 लाख 58 हजार रुपये है।इन कार्यों में से 11 कार्य पूर्ण हो चुके हैं,11 कार्य प्रगतिरत हैं, और 30 कार्यों की जल्द ही शुरुआत की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि ये सभी कार्य डीएमएफ एवं मनरेगा के अंतर्गत संचालित किए जा रहे हैं, जिससे न केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण हो रहा है बल्कि ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है।मुलेर गांव में हो रहे बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका प्रत्यक्ष प्रभाव गांव की जमीनी हकीकत में देखा जा सकता है। जिन सड़कों से पहले केवल पैदल चलना संभव था, अब वहां ग्रामीण वाहन चलाते दिखाई दे रहे हैं। जल जीवन मिशन के बेहतरीन क्रियान्वयन से मुलेर ग्राम के शत प्रतिशत घरों में नलों से पेयजल की सुविधा प्राप्त है।जिसका मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं अवलोकन किया गया।

‘नियद नेल्लानार’ का मूल उद्देश्य था “जहां प्रशासन नहीं पहुंचा, वहां तक पहुंच बनाना”। इस संकल्पना को जमीनी स्तर पर उतारने में जिला प्रशासन ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया गया, जिससे लोग अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं को खुलकर साझा कर पाए। इसी के परिणाम स्वरूप अब ग्रामीण स्वयं अपने गांव के विकास में भागीदारी निभा रहे हैं। दंतेवाड़ा प्रशासन की यह पहल केवल मुलेर तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में योजना के विस्तार के साथ जिले के अन्य सुदूर और वंचित इलाकों तक यह परिवर्तनकारी पहल पहुंचाई जाएगी।

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