Raipur: नहीं देखा होगा इंसान और गाय का अनूठा प्रेम, सात साल से दरवाजा खोलकर रोज आती है शोरूम, सेवा में जुटा परिवार"/>

Raipur: नहीं देखा होगा इंसान और गाय का अनूठा प्रेम, सात साल से दरवाजा खोलकर रोज आती है शोरूम, सेवा में जुटा परिवार

HIGHLIGHTS

  1. गोप्रेम के साथ नवाचार से प्राकृतिक कृषि को नई दिशा देने में जुटा परिवार
  2. बीते सात वर्ष से प्रतिदिन गोमाता चंद्रमणि पधारती हैं साड़ियों की दुकान में
  3. स्थापित गोशाला में 300 से अधिक गोवंश की पूरे मनोयोग से की करते हैं सेवा

रायपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भी भाव, स्पर्श और संवेदनाओं का महत्व कम नहीं होगा। इसी भाव को साकार कर रहा है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का जैन परिवार गोप्रेम के साथ यह परिवार नवाचार से प्राकृतिक कृषि को नई दिशा देने के साथ स्वस्थ समाज की संकल्पना साकार करने में भी जुटा है।

गोप्रेम का भाव तो ऐसा है परिवार के सदस्य अखिल जैन की साड़ियों की दुकान में बीते सात वर्ष से प्रतिदिन गोमाता चंद्रमणि पधारती हैं और उन्हें दुलार करती हैं। सनातन संस्कृति की झलक दिखाता यह गोप्रेम अब इंटरनेट मीडिया पर लोगों की उत्सुकता और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। अखिल द्वारा स्थापित गोशाला में 300 से अधिक गोवंश की सेवा पूरे मनोयोग से की जाती है।

धनतेरस के दिन पधारीं गोमाता

मध्य भारत के सबसे बड़े कपड़ा बाजार, रायपुर के पंडरी मार्केट स्थित साड़ियों की दुकान में स्वयं गेट खोलकर अंदर प्रवेश करती गोमाता का वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद चर्चा में आए अखिल और उनके परिवार का गोसेवा भाव रोमांचित और प्रेरित करने वाला है। चंद्रमणि के दुकान में प्रवेश का क्रम वर्ष 2016 में शुरू हुआ। धनतेरस पूजन के समय गाय स्वयं गेट खोलते हुए अंदर प्रवेश कर गई।
पंडित जी ने पंचांग देखकर बताया कि गाय ने अति शुभकारी चंद्रयोग में दुकान में प्रवेश किया है। अखिल की पत्नी सपना ने गोमाता को चंद्रमणि नाम दिया। तब से यह गाय प्रतिदिन दोपहर बाद तीन से पांच बजे के बीच दुकान में दस से बीस मिनट तय आसन पर बैठती है। अखिल को चाटती है और चली जाती है। बछड़ा बाहर ही प्रतीक्षा करता है। रविवार को दुकान बंद होती है तो गोमाता पास ही स्थित अखिल के निवास पर पहुंचती हैं।

12 राज्यों में दिया तरल जैविक खाद का प्रशिक्षण

अखिल ने कृषि को रसायनमुक्त बनाने के लिए भी पहल की है। सूर्य के ताप में गोमूत्र, सीताफल और चिरैता की पतियों से तरल खाद “फसल अमृत तैयार की जाती है। अखिल इसका पेटेंट भी हासिल कर चुके है। देश में अन्य स्थानों पर भी प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन मिले, इसके लिए अखिल अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश सहित 12 राज्यों में फसल अमृत को तैयार करने का प्रशिक्षण किसानों को दे चुके हैं। इसके अलावा वह गोमूत्र से लोगों को स्वास्थ्यलाभ कराने के अभियान में भी जुटे हैं। इस अभियान में वह मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों का सहयोग भी लेते हैं।

पैतृक संपत्ति से बनवाई गोशाला

अखिल का परिवार शुरू से ही गोप्रेमी रहा है। इसीलिए अखिल के पिता को दादा ने कन्हैया नाम दिया। व्यवसाय के लिए 23 वर्ष पहले रायपुर आए अखिल उर्फ पदम डाकलिया ने वर्ष 2011 में पैतृक स्थल खैरागढ़ में 90 लाख रुपये से अधिक की पैतृक संपत्ति से गोशाला बनवाई।
मनोहर गोशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी अखिल के गायों के प्रति सेवाभाव और समर्पण को देखते हुए केंद्रीय पशुपालन व डेरी मंत्रालय ने उन्हें जीव जंतु कल्याण बोर्ड का मानद सदस्य बनाया है। अखिल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द व छत्तीसगढ़ की पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके को गो- उत्पाद भेंट कर चुके हैं। अनुसुइया उइके ने अगस्त, 2022 में प्रधानमंत्री को अखिल की गोशाला में तैयार गोबर की वैदिक राखी बांधी थी।

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