त्योहारों में मिठाई का बढ़ता सेवन लिवर के लिए कितना नुकसानदायक? ज्यादा चीनी से बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा

भारत में त्योहारों का जश्न मिठाइयों और पकवानों के बिना अधूरा माना जाता है। होली, दिवाली या कोई दूसरा त्योहार हो, घरों में मिठाइयां आती हैं और लोग एक-दूसरे को भी मिठाई खिलाते हैं। लेकिन इसी दौरान जरूरत से ज्यादा मीठा और भारी खाना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। खासकर लगातार अधिक मात्रा में चीनी का सेवन लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकता है।

शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. भुमेश त्यागी के मुताबिक, ज्यादा चीनी और कैलोरी का लंबे समय तक सेवन वजन बढ़ने, इंसुलिन प्रतिरोध और लिवर में फैट जमा होने जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।

फ्रक्टोज का लिवर से क्या है कनेक्शन?

टेबल शुगर और कई मीठे खाद्य पदार्थों व पेय में फ्रक्टोज पाया जाता है। इसका मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है। जब शरीर को लगातार जरूरत से ज्यादा कैलोरी और फ्रक्टोज मिलता है, तो लिवर अतिरिक्त ऊर्जा के कुछ हिस्से को फैट में बदल सकता है।

समय के साथ यह फैट लिवर की कोशिकाओं में जमा होने लग सकता है। इसी तरह की स्थिति को अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। इसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज यानी NAFLD के नाम से जाना जाता था।

ज्यादा मिठाई खाने के बाद शरीर में क्या होता है?

मिठाई में मौजूद कार्बोहाइड्रेट पचने के बाद शुगर में बदलते हैं और रक्त में पहुंचते हैं। ग्लूकोज का इस्तेमाल शरीर ऊर्जा के लिए करता है, जबकि अतिरिक्त ऊर्जा को शरीर भविष्य के इस्तेमाल के लिए जमा कर सकता है।

फ्रक्टोज का मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है। लगातार ज्यादा फ्रक्टोज और कैलोरी मिलने पर लिवर में डी नोवो लिपोजेनेसिस नामक प्रक्रिया के जरिए फैटी एसिड का निर्माण बढ़ सकता है। इसका कुछ हिस्सा लिवर की कोशिकाओं में फैट के रूप में जमा हो सकता है।

हालांकि, एक दिन या कभी-कभार ज्यादा मिठाई खाने से आमतौर पर ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। चिंता तब बढ़ती है जब लंबे समय तक अधिक चीनी और कैलोरी लेने की आदत बनी रहती है।

किन लोगों में खतरा ज्यादा हो सकता है?

अगर किसी व्यक्ति का वजन अधिक है, इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या है या टाइप-2 डायबिटीज है, तो लिवर में फैट जमा होने से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे लोगों के लिए मीठे पेय, अत्यधिक मिठाई और हाई-कैलोरी डाइट पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो सकता है।

क्या चीनी सीधे लिवर में सूजन करती है?

लिवर में फैट जमा होना और लिवर में सूजन या कोशिकाओं को नुकसान होना एक ही बात नहीं है। MASLD में कुछ लोगों के लिवर में फैट जमा हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में सूजन या लिवर डैमेज भी हो।

हालांकि, कुछ मामलों में मेटाबॉलिक समस्या आगे बढ़कर मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस की स्थिति तक पहुंच सकती है। इसमें लिवर में फैट के साथ सूजन और लिवर की कोशिकाओं को नुकसान भी हो सकता है।

अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो लिवर में फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याएं विकसित हो सकती हैं। कुछ मामलों में लिवर कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।

त्योहारों में कैसे रखें लिवर का ख्याल?

त्योहारों के दौरान मिठाई पूरी तरह छोड़ना हर किसी के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन मात्रा और बार-बार सेवन पर नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण है। खासकर मीठे पेय और अत्यधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना फायदेमंद हो सकता है।

कुल मिलाकर, समस्या सिर्फ कभी-कभार मिठाई खाने की नहीं बल्कि लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा चीनी और कैलोरी लेने की आदत से जुड़ी है। इसलिए त्योहारों की मिठास का आनंद लेते हुए संतुलित खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि पर भी ध्यान देना जरूरी है।

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