महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन करते समय न भूलें ये जरूरी काम, 16 सुहागिनों को भोजन कराने की है मान्यता

Mahalakshmi Vrat 2026: 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन 3 अक्टूबर को होगा। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होने वाला यह व्रत 16 दिनों तक चलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत के अंतिम दिन विधि-विधान से उद्यापन करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य एवं सौभाग्य का वास होता है।

अगर आपने भी पूरे 16 दिन महालक्ष्मी व्रत रखा है, तो उद्यापन के दिन पूजा, हवन, भोग, सुहागिनों को भोजन और दान-दक्षिणा से जुड़ी विधि जानना जरूरी है।

सुबह स्नान कर करें पूजा की तैयारी

उद्यापन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें।

इस तरह करें कलश स्थापना

चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर उसके ऊपर जल से भरा कलश रखें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं और कलावा बांधा हुआ नारियल स्थापित करें। व्रत के पहले दिन से रखा गया 16 गांठ वाला पवित्र धागा भी मां लक्ष्मी के सामने रखें। उस पर रोली और अक्षत अर्पित करें।

मां लक्ष्मी को अर्पित करें ये भोग

पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल वस्त्र और शृंगार सामग्री अर्पित करें। भोग में चावल की खीर, पूरियां और मौसमी फल रखे जा सकते हैं। पूजा संपन्न करने के बाद हवन की तैयारी करें।

108 आहुतियों से करें हवन

हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर ‘ॐ महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करते हुए 108 आहुतियां देने की परंपरा बताई गई है। हवन के अंत में खीर और पूरियों की आहुति देने की भी मान्यता है।

16 सुहागिनों को भोजन कराने की परंपरा

उद्यापन के दिन 16 सुहागिन महिलाओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराने की परंपरा बताई गई है। भोजन के बाद उन्हें 16 शृंगार की वस्तुएं, फल और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है।

यदि 16 सुहागिन महिलाएं उपलब्ध न हों, तो 16 कन्याओं को भोजन कराने या उनके नाम से मंदिर में दान करने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

16 गांठ वाले धागे से करें उपाय

उद्यापन के दिन पूजा के बाद कच्चे सूत में 16 गांठ लगाएं। इसके बाद ‘ॐ महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करते हुए धागे पर कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। फिर इसे मां लक्ष्मी के चरणों में समर्पित करें।

पूजा पूरी होने के बाद इस सूत्र को दाहिने हाथ में बांधने या धन-धान्य से जुड़े स्थान जैसे तिजोरी में सुरक्षित रखने की मान्यता है।

उद्यापन के दिन इन बातों का रखें ध्यान

– किसी से विवाद या क्रोध करने से बचें।
– भोजन सात्विक रखें।
– लहसुन और प्याज का सेवन न करने की परंपरा बताई गई है।
– पूजा और उद्यापन की प्रक्रिया श्रद्धा एवं स्वच्छता के साथ करें।
– सुहागिनों या कन्याओं को भोजन कराने और दान-दक्षिणा देने के बाद ही स्वयं अन्न ग्रहण करें।

 

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