हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर भूलकर भी न करें ये काम! भद्रा में रहेगा पृथ्वी पर वास, जानें शुभ-अशुभ समय

सनातन धर्म में प्रथम पूज्य गणपति बप्पा की कृपा होने से हर काम निर्विघ्न रूप से संपन्न होने की मान्यता है। गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत बेहद खास माना जाता है। हर महीने आने वाली इस तिथि में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे हेरंब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और शाम के बाद गणेश जी की पूजा करके चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। इस बार व्रत की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय क्या रहेगा।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी कब है?
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर आरंभ होगी। इसका समापन 1 सितंबर को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा। तिथि के चंद्रोदय से संबंध को देखते हुए संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए दो शुभ समय मिलेंगे। गणेश जी की पूजा के लिए सुबह 5:58 से 7:34 बजे तक पहला समय रहेगा। इसके बाद 9:10 से 10:46 बजे तक दूसरा मुहूर्त है। शाम को दीप जलाने का समय 6:44 बजे रहेगा।
भद्रा में न करें शुभ काम
हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर सुबह 5:58 से 8:50 बजे तक भद्रा रहेगी। इस बार भद्रा का वास पृथ्वी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसे समय में मांगलिक और शुभ कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है।
रात में मिलेगा चंद्र दर्शन
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। 31 अगस्त को चंद्रमा का उदय रात 8:29 बजे होगा। चंद्रोदय के बाद गणेश जी का पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा किया जा सकता है। ऐसे व्रती जो चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलते हैं, वे उसी रात पारण कर सकते हैं। वहीं, अगले दिन पारण की परंपरा मानने वाले लोग 1 सितंबर को सूर्योदय के बाद 5:59 बजे से व्रत खोल सकते हैं।
गणेश पूजा से दूर होंगे संकट
संकष्टी चतुर्थी को विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताएं हैं कि बप्पा को समर्पित इस व्रत को रखने से चंद्र दोष को शांत करने में भी मदद मिलती है।







