कभी हाथों में थी बंदूक, अब शान से लहराया तिरंगा

सुकमा : स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर सुकमा के पुनर्वास केंद्र में देशभक्ति और नई उम्मीदों का भावपूर्ण नजारा देखने को मिला। केंद्र में 112 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने हाथों में तिरंगा थामकर भाईचारे, शांति और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। कभी जिन हाथों में एके-47 जैसी बंदूकें थीं, वही हाथ आज तिरंगा लेकर समाज की मुख्यधारा में लौटने और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत का संकल्प लेते नजर आए।

80वें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर का पुनर्वास केंद्र पहुंचना विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा। उन्होंने ध्वजारोहण के लिए पुनर्वासित महिला अमीला पदामी को आमंत्रित कर न केवल उन्हें सम्मान दिया, बल्कि पुनर्वासित युवाओं के भीतर आत्मविश्वास और अपनत्व की भावना को भी मजबूत किया। एसपी श्री गुर्जर के इस संवेदनशील और सकारात्मक कदम की उपस्थित लोगों ने मुक्तकंठ से सराहना की।

एसपी मयंक गुर्जर के आमंत्रण के बाद पुनर्वासित महिला अमीला पदामी के हाथों तिरंगा फहराए जाने का क्षण पुनर्वास केंद्र के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक बन गया। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान की गूंज के बीच सभी पुनर्वासित युवाओं ने तिरंगे को सलाम किया। यह दृश्य इस बात का जीवंत संदेश बना कि सही अवसर, विश्वास और मार्गदर्शन मिलने पर हिंसा के रास्ते से लौटे युवा भी देश के विकास और समाज की मजबूती में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव नहीं, बल्कि बदलाव और पुनर्निर्माण की प्रेरक तस्वीर भी बना। शासन-प्रशासन की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौट रहे इन युवाओं के हुनर और उम्मीदों को नई दिशा मिल रही है। कार्यक्रम में श्री हरिशंकर साहू, क्रांति बघेल, सुमन मौर्य, भगत यादव, राजेश तिग्गा, किच्चे मुका, सोढ़ी भीमा सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। तिरंगे की छांव में मनाया गया यह पर्व सुकमा में शांति, विश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बनकर सामने आया।

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