शिवलिंग पर पहले जल, दूध या पंचामृत? सावन में जानिए पूजा का सही क्रम और वर्जित बातें

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥…. सावन का महीना महादेव की कृपा पाने का सबसे पावन अवसर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह में भगवान शिव और माता पार्वती धरती पर भ्रमण करने के लिए आते हैं। इसलिए हर भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाता है। सावन में शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। तो अगर आप भी भगवान शिव की खास कृपा पाना चाहते हैं तो पूरे सावन माह शिवजी की आराधना करें और सोमवार का व्रत भी करें। आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए और जलाभिषेक सही विधि क्या है। वहीं बता दें कि सावन में सोमवार व्रत करने के साथ ही इस पूरे माह में भी उपवास रखने का विधान है। तो अगर आप भी सावन माह में व्रत रख रहे हैं तो इन नियमों का ध्यान रखें।

शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाएं (शिवलिंग पूजा विधि)

जल: सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल धीर-धीरे चढ़ाएं। जल चढ़ाने के लिए तांबे या पीतल के लोटे का इस्तेमाल करें। जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें।

पंचामृत: जल चढ़ाने के बाद शिललिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत दही,  घी, शहद और चीनी को मिलाकर बनाया जाता है। पंचामृत चढ़ाने के बाद फिर से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और शिवलिंग को हल्के हाथों से पोंछें।

कच्चा दूध: अगर आप शिवलिंग पर पंचामृत नहीं चढ़ा रहे हैं तो फिर कच्चा दूध चढ़ाएं। शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं। दूध चढ़ाने के बाद फिर से शुद्ध जल या गंगा जल चढ़ाएं।

चंदन: जल चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर सफेद या पीला चंदन का लेप लगाएं।

बेलपत्र, धतूरा और फूल: चंदन के बाद शिवलिंग पर महादेव की प्रिय चीजें बेलपत्र, धतूरा, भांग और मदार के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही शमी के पत्ते भी चढ़ा सकते हैं।

अक्षत और जनेऊ: इसके बाद शिवलिंग पर अक्षत यानी बिना टूटे हुए चावल चढ़ाएं। फिर भगवान शिव को जनेऊ अर्पित करें।

भोग: अब शिवलिंग पर पान का पत्ता, सुपारी और इलायची चढ़ाएं। इसके साथ ही भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं।

आरती: धूप-दीप जलाकर कपूर से भगवान शिव की आरती करें। आप चाहे तो आरती से पहले शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

इन बातों का ध्यान रखें

  1. शिवलिंग पर हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके खड़े हों और जल अर्पित करें।
  2. जल हमेशा धीरे-धीरे और पतली धार बनाकर चढ़ाएं। शिवलिंग पर कभी भी एक साथ पूरा जल न चढ़ाएं।
  3. शिवलिंग पर हल्दी, तुलसी, केतकी का फूल, सिंदूर नहीं चढ़ाएं। ये सभी चीजें शिवजी की पूजा में वर्जित है।
  4. शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल न चढ़ाएं।
  5. शिवलिंग पर कटा-फटा या धारीदार वाला बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए।
  6. बेलपत्र को हमेशा उलटा चढ़ाएं, जिससे कि बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करें।

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