सावन का दूसरा सोमवार बेहद खास, सोम प्रदोष के साथ बना दुर्लभ संयोग; महादेव को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम

सावन 2026 भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस दिन सावन सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। महादेव को सोमवार और प्रदोष, दोनों ही अत्यंत प्रिय हैं। इस दुर्लभ शिव संयोग में शिव पूजा और मंत्र जाप से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। तो चलिए जानते हैं यह दिन शिव जी का आराधना के लिए क्यों विशेष माना जा रहा है।

दूसरे सावन सोमवार पर दुर्लभ शिव संयोग

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। सोमवार उनका प्रिय दिन है, जबकि प्रदोष तिथि शिव आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ बताई है। जब सावन का सोमवार और सोम प्रदोष व्रत एक साथ आते हैं तो शिव जी की उपासना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

क्यों खास है यह संयोग?

जब सावन सोमवार के साथ भगवान शिव से जुड़े प्रमुख व्रत या पर्व एक ही दिन आते हैं, तो उसे बेहद शुभ माना जाता है। 10 अगस्त को सोमवार, सावन और प्रदोष व्रत का संगम बनेगा। इसके बाद 17 अगस्त को सावन सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ेंगे। यही वजह है कि इन दोनों तिथियों को दुर्लभ शिव संयोग कहा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, व्रत और मंत्र जाप का विशेष फल मिलता है।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष काल को महादेव की आराधना का सबसे श्रेष्ठ समय बताया गया है। जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। सावन सोमवार और सोम प्रदोष का एक साथ होना इस दिन की अहमियत को और भी बढ़ा देता है।

मिलेगा दोहरे व्रत का पुण्य

महादेव को प्रदोष व्रत अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि इस दिन शिवजी की आराधना करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। चूंकि सावन माह 2026 का दूसरा सोमवार और सोम प्रदोष एक साथ पड़ रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को दोनों व्रतों का पुण्य एक साथ प्राप्त होने की मान्यता है। इसलिए शिव साधकों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

इस अवसर पर करें ये शुभ काम

यह तिथि शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम बताई जा रही है। अगर आप भी इस पुण्य तिथि का ज्यादा से ज्यादा लाभ लेना चाहते हैं तो, इस दिन शिवलिंग पर जल और गंगाजल से अभिषेक करें। उन्हें बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें। महामृत्युंजय मंत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप विशेष फलदायी रहेगा है। घी का दीपक जलाकर शिव आरती करें। व्रत रखकर सात्विक जीवन और संयम का पालन करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button