रायपुर: बेदखली कार्रवाई पर बवाल, पुलिस-ग्रामीण आमने-सामने, गांव में भारी तनाव

रायपुर : राजधानी रायपुर के नकटी गांव में शुक्रवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब प्रशासन की कार्रवाई के तहत एक दर्जन से अधिक मकानों को तोड़ने पहुंची पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। ग्रामीणों ने गांव के बाहर ही पुलिस और प्रशासनिक अमले का विरोध करते हुए उन्हें रोक दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

जानकारी के मुताबिक प्रशासन ने ग्रामीणों को 48 घंटे के भीतर घर खाली करने का नोटिस जारी किया था। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद पुलिस और प्रशासन कार्रवाई के लिए गांव पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध किया। बता दें कि इससे पहले भी इसी मुद्दे को लेकर गांव में विवाद और प्रदर्शन हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार विधायक कॉलोनी के लिए गांव को खाली करा रही है। उनकी पुश्तैनी जमीन पर भूमाफियाओं और रसूखदार लोगों की नजर है। उन्हें बेघर करने की साजिश रची जा रही है।

पिछले साल भी विरोध प्रदर्शन के बाद रोकी गई थी कार्रवाई

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने सैकड़ों परिवारों को बेदखल करने का नोटिस जारी किया था, लेकिन उस समय जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के हस्तक्षेप और अमित बघेल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एकजुट होकर कड़ा आंदोलन किया था, जिसके कारण कार्रवाई रोक दी गई थी। अब एक बार फिर बिना उचित पुनर्वास और मुआवजे के गांव खाली कराने की तैयारी की जा रही है।

जिस जमीन पर पीएम आवास बनाया उसे भी तोड़ने की तैयारी

ग्रामीणों का कहना है कि जिस 37 एकड़ भूमि को चारागाह बताकर कब्जा हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वह उनके पूर्वजों द्वारा गांव की निस्तारी और पशुओं के उपयोग के लिए दान की गई थी। उनका यह भी आरोप है कि इसी जमीन पर शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक सहायता देकर पक्के मकानों का निर्माण कराया था, लेकिन अब उन्हीं मकानों को अवैध बताकर तोड़ने की तैयारी की जा रही है।

कार्रवाई हुई तो पूरा गांव होगा प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत नकटी की आमसभा ने इस प्रस्ताव पर पहले ही लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्रवाई हुई तो 1300 से अधिक आबादी वाला पूरा गांव प्रभावित होगा। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर और कर्ज लेकर इन मकानों को सजाया था, वे आज खुले आसमान के नीचे आने की कगार पर हैं।

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