छात्रों की सुरक्षा पर सख्ती, काकादेव के 16 अवैध कोचिंग सेंटर सील

कानपुर: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में कई छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन अब एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इसी क्रम में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने शहर की सबसे बड़ी कोचिंग मंडी काकादेव में बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 अवैध कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया।
केडीए की इस कार्रवाई से काकादेव क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह से शुरू हुए अभियान के दौरान अधिकारियों की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और चिन्हित भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि जिन भवनों पर कार्रवाई की गई, उनमें से कई बिना निर्धारित मानकों और आवश्यक स्वीकृतियों के संचालित हो रहे थे।
लखनऊ हादसे के बाद जागा प्रशासन
लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग भवन में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में कई छात्रों की मौत हुई, जिनमें कानपुर के दो छात्र भी शामिल थे। हादसे के बाद प्रशासन ने सभी जिलों में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत कानपुर विकास प्राधिकरण ने काकादेव क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण और अग्निशमन व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं। इसके बाद संबंधित भवनों को सील करने की कार्रवाई की गई।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
कार्रवाई के दौरान कई कोचिंग संस्थानों में कक्षाएं संचालित हो रही थीं। अचानक सीलिंग होने से छात्रों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई छात्र अपनी पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं को लेकर चिंतित दिखाई दिए, लेकिन कैमरे पर कुछ भी बोलने से कतराते दिखाई दिए। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है तो वहां बड़ी दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक ही रास्ते से एंट्री और एग्जिट बना खतरा
ऐसे में स्थानीय निवासियों का कहना है कि काकादेव में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता है। अधिकांश इमारतों में आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आग या अन्य किसी आपदा की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल चुनिंदा भवनों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे क्षेत्र का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
केडीए अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। शहर में ऐसे सभी कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी जो नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं। जिन भवनों में अग्निशमन, पार्किंग, नक्शा स्वीकृति और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में शुरू हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि अब सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। ऐसे में कोचिंग संस्थानों और भवन संचालकों के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य हो गया है। (इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)







