14 लोकों की रहस्यमयी दुनिया: जानिए स्वर्ग, पाताल और ब्रह्मलोक का महत्व

सनातन धर्म में ब्रह्मांड के विभाजन के रूप में 14 लोकों (भुवनों)का उल्लेख विष्णु पुराण, श्रीमद्गागवत गीता और ब्रह्मांड पुराण में मिलता है। जिसने मुताबिक लोकों की संख्या 14 बताई गई है। आइए जानते हैं ब्रह्मांड में स्थित 14 लोकों के नाम और उनमें कौन निवास करते हैं?

हिंदू संस्कृति के मुताबिक, इस ब्रह्मांड में 14 भुवन है, जिसमें 7 ऊपरी लोक और 7 पाताल लोक हैं। इनमें पाताल लोक को स्वर्ग भी कहा जाता है। ये सभी पृथ्वी के गर्भ में स्थित हैं। माना जाता है कि, ऊपरी लोक के स्वर्ग से पाताल लोक का स्वर्ग थोड़ा अधिक महत्व रखता है। यहां दिन और रात में किसी भी तरह का अंतर नहीं है। 7 ऊपरी लोक कौन-कौन से हैं?

भू्र्लोक (पृथ्वी)
धरती लोक को कर्म लोक भी कहा जाता है, जहां 84 लाख प्रजातियों के जीव-जंतु और मानव समुदाय एक साथ निवास करते हैं।

भुवर्लोक (राक्षस और भूत पिशाच)
पृथ्वी और सूर्य के बीच के स्थान को भुवर्लोक के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि, यहां पर अंतरिक्ष के देवता निवास करते हैं।

स्वर्गलोक
हिंदू संस्कृति में स्वर्ग लोक को ऊपरी लोक कहा जाता है। यह वह स्थान है, जहां अच्छे कर्म करने वाला व्यक्ति अपने पुण्य कर्म के खत्म होने तक निवास करता है। स्वर्ग लोक का स्वामी इंद्र देवता को माना जाता है। महार लोक (भृगु महिर्षि)
हिंदू संस्कृति के अनुसार, यह लोक ध्रुव से एक करोड़ योजन की दूरी पर स्थित है। भृगु आदि सिद्धगुण जैसे ऋषि यहां पर निवास करते हैं। माना जाता है कि, यह स्थान हमेशा निर्मल और शून्य की अवस्था में रहता है।

जन लोक (सप्त ऋषि)
यह लोक महार लोक से करीब 2 करोड़ योजन ऊपर है। इस लोक में सनकदिक आदि ऋषि रहते हैं और कई तरह के विद्वान और तपस्वी ऋषि भी यहां निवास करते हैं।

तापा लोक
यह लोक जनलोक से करीब 8 करोड़ योजन की दूरी पर है, यहां विराज नामक देवता रहते हैं।

सत्यलोक (ब्रह्मा धाम)
सत्यलोक से 12 करोड़ योजन ऊपर स्थित है, सत्यलोक जहां ब्रह्मा जी निवास करते हैं। इसे ब्रह्मलोक के नाम भी से भी जाना जाता है। इसके अलावा इस लोक में सर्वोच्च श्रेणी के ऋषि मुनि निवास करते हैं। इस लोक का पुराणों में विशेष महत्व है। 14 लोकों के नाम (AI-Generated Image)

7 अधोलोक कौन-कौन से हैं?
अटल लोक
यह हमारी धरती से 1000 योजन की गहराई पर स्थित है और इसकी जमीन सफेद है। जिससे पाताल के राजा मायादानव के पुत्र असुर बल ने 96 तरह के मायाजल से रचा है।

वितल लोक
स्वर्ण खानों के स्वामी भगवान शिव अपने गणों, भूतों और ऐसे ही अन्य जीवों के साथ रहते हैं और माता भवानी भी उनके साथ रहती हैं।

सुतल लोक
सुतल लोक में महाराज विरोचन के बेटे महाराज बलि आज भी इस लोक में श्री भगवान की आराधना करते हुए निवास करते हैं और भगवान महाराज बलि के द्वार पर गदा धारण लिए खड़े हैं।

तलातल लोक
सुतल लोक से नीचे तलातल लोक है, जहां त्रिपुराधि पति दानवराज मय रहता है। मय दानव विषयों का परम गुरु है।

महातल लोक
महातल लोक में हमेशा क्रुद्ध रहने वाले अनेक फनों वाले सांपों के संतान निवास करते हैं, जिनमें कुहक, तक्षक, कालिय और सुषेण प्रमुख हैं।

रसातल लोक
इस लोक में दिति तथा दनु के आसुरी पुत्रों का निवास है, ये पणि, निवात-कवच, कालेय तथा हिरण्य पुरवासी कह जाते हैं। ये देवताओं के शत्रु हैं और सांपों की ही तरह बिलों में रहते हैं।

पाताल लोक
इस लोक में कई तरह की आसुरी सांप और नागलोक के स्वामी रहते हैं, जिनमें वासुकी प्रमुख है। जिनमें से कुछ के पांच, सात, दास, सौ और अन्य सांपों के हजार फन होते हैं। पाताल लोक के मूल में भगवानअनन्त और संकर्षण निवास करते हैं, जो हमेशा दिव्य पर आसीन हैं और संपूर्ण ब्रह्मांड को धारण किए रहते हैं।

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