अच्छे लोगों को ही क्यों मिलते हैं सबसे ज्यादा दुख? भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में बताया इसका रहस्य

यचो धर्मस्ततो जयः अर्थात् जहां धर्म है, वहां विजय निश्चित है। सनातन संस्कृति और हमारे शास्त्रों में इसका उल्लेख देखने को मिलता है। लेकिन रोजाना के जीवन में अक्सर चीजें इसके विपरीत देखने को मिलती है। कई बार हमें ऐसा लगता है कि, जो व्यक्ति ईमानदारी, सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलता है, उसे ही सबसे ज्यादा दुख, कष्ट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर, अधर्म और शॉर्टकट रास्ता चुनने वाले लोग जीवन में काफी सुखी और सफल दिखाई देते हैं। आइए भगवद्गीका से इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने की कोशिश करते हैं और जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई?

किन कारणों से दुख भोगना पड़ता है? भगवद्गीता में जब अर्जुन ने श्रीकृष्ण से सवाल करते हुए पूछा कि, अच्छे इंसान परेशान और बुरे इंसान हमेशा खुश क्यों रहते हैं?

इस पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर देते हुए कहा कि, अच्छे लोगों को दुख अक्सर तीन कारणों से भोगना पड़ता है।

सनातन धर्म के मुताबिक, आत्मा कई बार जन्म लेती है। कई बार इस जन्म का दुख पिछले जन्म के कर्मों का फल होता है। लेकिन ध्यान रखना जो व्यक्ति अच्छे कर्म कर रहा है, उसका भविष्य सुधर रहा है।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि, ईश्वर उन्हें गलत मार्ग पर जाने से बचा रहा है। कई बार जो चीजें हमें दुख देती हैं, वही हमें बड़े विनाश से बचाती है। ईश्वर हमारी सभी इच्छाएं इसलिए पूरी नहीं करता क्योंकि वे हमारा भविष्य देख सकते हैं।

समय से बड़ा कोई न्यायधीश नहींभगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि, जिस भी व्यक्ति को भगवान अपने करीब लाना चाहते हैं, उसके अंदर से अहंकार, लालच और मोह तोड़ते हैं। दुख इंसान को गहरा बनाता है। आध्यात्मिक बनाता है, सच्चाई सिखाता है और ईश्वर के करीब लाता है।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि, समय सबसे बड़ा न्यायधीश है। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि, आज जो गलत करके यश, कीर्ति, नाम और पैसा कमा रहा है, कल वही बुरे कर्मों का साक्षी बनेगा। जो आज बिना शॉर्टकट के मेहनत कर रहा है, कल वही सम्मान और शांति का हकदार बनेगा।

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