आवारा और खतरनाक कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

 

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा और खतरनाक कुत्तों से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रेबीज संक्रमित या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आम लोगों की जान की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इनमें वे आवेदन भी शामिल थे, जिनमें डॉग लवर्स और कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के पहले जारी निर्देशों को रद्द करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देशभर में बढ़ रही डॉग बाइट घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि अकेले राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। कई छोटे बच्चों के चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटें आईं।

कोर्ट ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां साल 2026 के पहले चार महीनों में ही करीब दो लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है।

पहले भी जारी किए थे निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखा जाए और उन्हें दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी।

इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट निर्देश दिए कि राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। हर जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से कार्यरत एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाए। अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार एबीसी सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।

सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। एंटी-रेबीज वैक्सीन और दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए एनएचएआई प्रभावी कदम उठाए। रेबीज संक्रमित या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों के मामलों में जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया (दया मृत्यु) की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट के आदेश लागू करने वाले अधिकारियों को कानूनी संरक्षण दिया जाए ताकि उनके खिलाफ अनावश्यक एफआईआर या कार्रवाई न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशु संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है, लेकिन किसी भी स्थिति में लोगों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।

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