वन विभाग भर्ती मामले में कोर्ट का सख्त रुख, कहा- तय मानकों का पालन जरूरी

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने वन विभाग की 2020 की भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी वॉक टेस्ट में फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देने से इंकार कर दिया है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और फॉरेस्ट रेंजर के पदों पर भर्ती के लिए दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है, सार्वजनिक रोजगार के मामलों में निष्पक्षता और नियमों का पालन सर्वोपरि है।

पढ़िए क्या है मामला?

सीजी पीएससी ने 10 जून 2020 को छत्तीसगढ़ वन सेवा (राजपत्रित) भर्ती नियम, 2015 के तहत वन रेंजर के 157 और सहायक वन संरक्षक के 21 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। नियमों के अनुसार पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 4 घंटे में 26 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों के लिए 4 घंटे में 16 किलोमीटर की पैदल चाल अनिवार्य योग्यता के रूप में निर्धारित की गई थी। 12 सितंबर 2023 को आयोजित इस परीक्षा में कुछ अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर वॉक पूरी करने में असफल रहे और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। असफल अभ्यर्थियों ने भीषण गर्मी, सड़कों पर भारी ट्रैफिक और पानी की समुचित व्यवस्था न होने का हवाला देते हुए दूसरे मौके के लिए आवेदन किया था।

आपत्ति के बाद सरकार ने अपने आदेश को लिया वापस

राज्य सरकार ने शुरुआत में 18 जनवरी 2024 को एक आदेश जारी कर अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देने का निर्णय लिया था, लेकिन इस निर्णय को प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। बाद में सामान्य प्रशासन विभाग की राय और भर्ती नियमों में ऐसे किसी प्रावधान के न होने के कारण सरकार ने दूसरा मौका देने के संबंध में अपने पहले के आदेश को 20 जून 2024 को वापस ले लिया।

हाई कोर्ट ने कहा- नियमों से समझौता नहीं

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने फैसले में कहा है, भर्ती नियम, 2015 में वॉक टेस्ट के लिए दूसरा अवसर देने का कोई प्रावधान नहीं है। परीक्षा के बीच में खेल के नियम नहीं बदले जा सकते। सभी 211 अभ्यर्थियों ने एक ही परिस्थितियों में परीक्षा दी थी,

इसलिए केवल असफल अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देना पारदर्शी चयन प्रक्रिया के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने माना कि वॉक टेस्ट कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि सेवा की आवश्यकताओं के लिए एक न्यूनतम योग्यता मानक है।

हाई कोर्ट ने कहा, खाली पदों को वेटिंग लिस्ट से भरें

हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों को मौका मिलेगा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है, जो पद शारीरिक परीक्षा में अनुपस्थित रहने या फेल होने के कारण रिक्त रह गए हैं, उन्हें पीएससी की सिफारिशों के आधार पर वेटिंग लिस्ट से जल्द से जल्द भरा जाए।

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