बस्तर की परंपरा को मिट्टी में उकेरने वाली बसंती चक्रधारी को बड़ा सम्मान

भानुप्रतापपुर : ग्राम बांसला की माटी की महक अब राज्य स्तर पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बांसला की मिट्टी शिल्पी श्रीमती बसंती चक्रधारी को हस्तशिल्प के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्यस्तरीय हस्तशिल्प पुरस्कार 2024-25 हेतु चयनित किया गया है। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा घोषित इस गौरवशाली उपलब्धि के लिए उन्हें जल्द ही प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया जाएगा। ​श्रीमती बसंती चक्रधारी ने अपनी कला के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक गोटुल संस्कृति को मिट्टी की आकृतियों में बेहद खूबसूरती से उकेरा है। उनकी इस मौलिक कलाकृति ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें प्रदेश के उन पांच चुनिंदा शिल्पकारों की सूची में शामिल कराया, जिन्हें इस वर्ष यह सम्मान मिल रहा है।

​कलाकार दंपति: विरासत को आगे बढ़ा रहे पति-पत्नी

​बांसला का यह चक्रधारी परिवार पिछले दो दशकों से मिट्टी शिल्प को समर्पित है। बसंती चक्रधारी के पति श्री परमेश्वर चक्रधारी स्वयं एक मंझे हुए कलाकार हैं, जिन्हें वर्ष 2011-12 में भी छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। अपनी सफलता का श्रेय अपने पति को देते हुए बसंती चक्रधारी ने कहा मेरे पति ही मेरी प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने न केवल मुझे मिट्टी कला की बारीकियां सिखाईं, बल्कि मुझे आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया। आज उन्हीं के मार्गदर्शन का परिणाम है कि मुझे यह सम्मान मिल रहा है।

​20 वर्षों की साधना और सामाजिक योगदान

​परमेश्वर चक्रधारी पिछले 20 वर्षों से मूर्तियां और बर्तन बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी बनाई कलाकृतियों ने न केवल गांव बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। वर्तमान में यह दंपति अपनी कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य भी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के तत्वावधान में वर्तमान में एक 50 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जा रहा है, जहाँ वे स्थानीय लोगों को मिट्टी के बर्तन और मूर्तियां बनाने का हुनर सिखा रहे हैं। ​इस उपलब्धि से पूरे भानुप्रतापपुर क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। यह पुरस्कार न केवल एक कलाकार का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला और संस्कृति की जीत है।

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