सुशासन से समृद्धि तक के सफर में किसानों को मिला भरोसा और धान विक्रय का समय पर हुआ भुगतान

दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार के सुशासन से समृद्धि तक के सफर का असर अब सुदूर अंचलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा हैं।इसका प्रत्यक्ष उदाहरण दंतेवाड़ा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025 26 के तहत की जा रही धान खरीदी व्यवस्था है,जो पूरी पारदर्शिता और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है। सभी खरीदी केंद्रों में शासन के निर्देशानुसार 21 क्विंटल प्रति एकड़ अधिकतम खरीदी को प्राथमिकता में रखते हुए किसानों से खेत के निकली धान की उपज को खरीदा जा रहा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दंतेवाड़ा जिले में अब तक 84618.80 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 29950 क्विंटल धान का उठाव कराकर सफलतापूर्वक मिलिंग कार्य भी पूरा कर लिया गया है।

धान के खरीदी के साथ लगातार उठाव होने से खरीदी केंद्र में पर्याप्त जगह बनी हुई है जिससे बिना अवरोध के धान खरीदी जारी है।सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक धान खरीदी से संबंधित भुगतान प्रक्रिया भी सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है, जिससे किसानों में संतोष और भरोसा देखने को मिल रहा है। सरकार की प्राथमिकता रही है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर और सीधे प्राप्त हो और दंतेवाड़ा जिले में यह उद्देश्य जमीन पर साकार होता नजर आ रहा है। इसके अलावा धान खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ बारदाना, स्वच्छ जल, शौचालय, सीसीटीवी, हमाल की व्यवस्था की गई है। इस वर्ष किसानों की भागीदारी बढ़ी है और वे बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच पा रहे हैं। जिले के बालूद धान खरीदी केंद्र में 12 गांव के कुल 1200 किसान पंजीकृत है जिनमें 379 किसानों द्वारा अब तक 12,810 धान की खरीदी की जा चुकी है।

बालूद धान खरीदी केंद्र में धान बिक्री करने चितालंका से पहुंचे स्थानीय किसान मनकू राम का कहना है कि विष्णु देव साय सरकार की नीतियों से उन्हें पहली बार यह भरोसा हुआ है कि उनकी मेहनत की फसल सुरक्षित हाथों में है। पारदर्शी खरीदी, रिकॉर्ड आधारित व्यवस्था और जवाबदेही ने शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।वही आवरा भाटा से आए किसान शंकर सिंह ठाकुर ने टोकन ऐप की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे किसानों को काफी मदद मिलती है। दंतेवाड़ा के बालूद धान खरीदी केंद्र में इस बात का प्रमाण है कि सुशासन केवल नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि उसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में खरीदी और भुगतान के आंकड़ों में और बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी।

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